एक डरावनी कहानी
तो बात कुछ तीन साल पहले की है। हम गाँव जा रहे थे सुबह के तीन बजे। घुप्प अन्धेरा था और सड़क खाली होने के कारण बाइक थोड़ी तेज ही थी। शहर में हमारा मकान है और गाँव हमारा करीब 30 किलोमीटर अंदर। हम शहर छोड़ बस निकले ही थे की बाहर में एक खाली मकान में से बच्चा झांकता दिखा। गाँव आते जाते रहने के कारण हमको मालूम था की उस घर में कोई रहता नहीं है।
एकबारगी तो हमारा कलेजा धक्क कर गया पर हम बस उठ के गाँव ही चल दिये थे सो हमको लगा हमको नींद में भ्रम हो रहा है। हम आराम से गाड़ी चलाने लगे। उस बच्चे का चेहरा एकदम सामने घूम रहा था और जाने क्यों मन हो रहा था की वापस घूम के उसको देख आये। जब बहुत ज्यादा बेचैन हुए तो हम गाड़ी घूमा दिये। वापस वहाँ पहुँच के हम जब गाड़ी का फ्लैश लाईट जलाए तो सुन्न रह गये। कुछ देर पहले जिस खिड़की पे हम बच्चे को लटके देखे थे ऊ बंद थी।
धकधक करता दिल ले हम तुरंत बाइक मोड़ लिये। इस बार हमको यकिन हो गया था की हम नींद में सपना देखे थे सो एकदम धीरे गाड़ी चलाने लगे ताकि कहीं झपकी लगे तो बचने की गुंजाइश हो। धीरे धीरे बढ़ते हम दो गाँव पार किये। पर एक अजीब सा शांती हमारा पिछा कर रहा था। 3 बजे तो इधर लोग उठ भी जाता था पर आज हमको कोई नहीं दिख रहा था। ना कोई स्ट्रीट लाइट दिख रही थी। गाँव शहर से ज्यादा ऐडवांस है हमारे।
हमारा गाँव अरेराज (सोमेश्वर महादेव जो डाक बम के लिये प्रसीद्ध है) अनुमंडल में पड़ता है। अभी हम अरेराज पहुँचे ही थे की सड़क पे दूरी बताने वाले पत्थर पे ऊ लड़का फिर बैठा दिखा। हमारा हाथ पैर कांपने लगा। गाड़ी ब्रेक दबने के कारण अजीब आवाज करने लगी। हमसे ऐक्सीलरेटर नहीं घूम रहा था। हम कितना भी कोशिश किये की उसकी तरफ ना देखें पर नजर घूम ही नहीं रहा था। उसका चेहरा गोरा था पर जैसे रोने से एकदम लाल हो गया था।
उसके हाथ से खून चू रहा था और पैर में शायद शीशा चुभा हुआ था जिससे लगातार खून गिर रहा था। हमको देखते ही वो अजीब तरह से मुस्कुराने लगा जिसके चलते हमारा दिमाग एकदम सुन्न हो गया।
हम महादेव को याद करने लगे। पर वो जैसे हिलना ही नहीं चाह रहा था। हमको परेशान देख वो हंसने लगा। हमारी साँस रुक गई थी। हम कुछ समझ नहीं पा रहे थे। वो कुछ दूर तक बाइक के साथ चला और फिर गायब हो गया।
हम जितनी तेज हो सकता था गाड़ी भगा दिये। हमारे गाँव को जाने के लिये दोराहा है। एक ओर हमारा गाँव है गंगा पिपरा और एक ओर है ‘इंग्लिश’! जी इंग्लिश नाम है उसका। दोराहा के पास हमको वो बच्चा फिर दिखा। इस बार लाल आँखे लिये जैसे मारने को आया हो। हम रो पड़े। हमसे गाड़ी ना चल रही थी। हम हाथ जोड़ लिये।
वो पास आ गया। गाड़ी के सामने उसको देख हम बेहोश से होने लगे थे। उसका पूरा शरीर नीला था। हर जगह घाव थे और ऐसा लग रहा था जैसे बहुत बेदर्दी से उसे मारा गया था। हम रो रहे थे बुरी तरह रो रहे थे। हमारी मुँह से बस इतना निकला, ” हम क्या बिगाड़े है तुम्हारा बाबू हमको जाने दो। कौन मारा है तुमको? हमको छोड़ दो!” वो अपना चेहरा उठाया। हम उसकी आँख में मौत देख सकते थे और चेहरे पे मुस्कुराहट जो हमको डर में देख बढ़ती जा रही थी।
कुछ देर चुप रहने के बाद वो एकदम से हमारा गरदन पकड़ते हुए बोला, “तू ही तो मारा रे!”
सुबह जब हमारा आँख खुला तो हम गाँव में अपने घर के बाहर वाले कुएं के पास खटिया पे पड़े हुए थे। हमको दोराहा के पास पड़ा देख गाँव के एक आदमी बाइक चला के हमको वहां ले आये थे। चाचा से पुछ्ने पर पता चला कि कुछ दिन पहले एक लड़का कार ले के एक बच्चे के उपर चढ़ा दिया था जो लोगों को दिख रहा था। हालांकि वो बच्चा कभी किसी को हानी नहीं पहुँचाया पर डराया जरुर!
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