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Showing posts from December, 2024

कुत्तों का शत्रु

 एक सुबह आयी  उसकी मौत की खबर  अखबार के साथ  एक पल को झिझका  दूजे पल अखबार को भींचे  बढ़ा उसके आजीवन निर्द्वन्द रहे आवास की ओर  जहाँ सोते थे कई सितारे उसके साथ  और चाँद दिया करता था पहरा सारी रात।  वहाँ पहुँचने पे देखा  एक मैं ही नहीं था संवेदना से लिप्त  कई और भी थे जिन्हें काम से फ़ुरसत थी।  पता चला  पेट कई दिनों से खाली था  शायद पीठ से मिलने  पीछे जा चुका था  तलवे सूखी धरती के प्रतिबिम्ब जान पड़ते थे  लकीरों ने अजीब आकृतियाँ बना रखी थी हर ओर  इसी बीच ठंडी हवाओं के थपेड़ों ने अपनी चाल चली और काली स्याह रात में गली के कुत्तों ने खो दिया  अपना सबसे बड़ा शत्रु। 

टूटते सितारे

 क्षितिज पर टूटते सितारें को फिर से किसी पन्ने के बीच दबाने को बेचैन, जैसे एक मुट्ठी भर आसमान का हिस्सा ले लेना चाहता हो… तुम्हारी याद आते ही अजीब से सवालों और खयालों से मन पगला सा जाता है! बेजान होती चिट्ठियों में तुम्हारे बारे लिखी कुछ लाइनें शोर करती है जैसे सूखती कोई नदी से दूर भागते हंस… किसी गुलाब की बेजान होती खुशबू जो कभी बेकश अपनी ओर खिंचती थी, तो किसी पन्ने पर उकेरी गई कुछ लाइनें जो कविता बनने की उम्मीद में दम तोड़ बैठी… अब ऐसा अक्सर तो नहीं होता मगर कभी कोई दो चार रोज भी ऐसे नहीं जाते जिनमें कभी एक पहर को तुम्हारी याद ने रेगिस्तान में उठती लहर से मुझे काबू ना कर लिया हो! खैर अबके ना आना, अब चले जाना ही बेहतर है… मगर वो कैसे जाये जो हमेशा यही कही आपके पास बैठा होता है? तुम यही कही होती हो… कही किसी कोने में मेरे भीतर… मेरी जिंदगी का कोई हिस्सा नहीं जिसे तुमने छुआ ना हो… इस किनारे की हर रेत तुम्हारे हाथों से होके फिसली है, इस समंदर का हर मोती तुमने बनाया है… :(

अंजान हथेलियां!

 दो खत भेजने के बीच कितना वक्त होना चाहिए? शायद उतना जितना खतों को लिखने में लगे... और फिर खतों को लिखने में वक्त लगता भी तो है। दो मेसेज के बीच कितना वक्त होता है? शायद कुछ सेकेंड या कुछ मिनट कभी... खतों में एक अरसा बीत जाता है! और फिर खतों में सब कुछ लिखा होता है। पिछले खत से अब तक हुई सारी बातें, पिछले खत का जवाब, दिल में उठती कहानियाँ, मन में उठते सवाल और सबसे जरुरी लौटती डाक से जवाब भेजने की लाईन, "जवाब लिखना... इंतजार रहेगा..." दो सितारों के बीच कितना फासला होता है? शायद एक हथेली से भर जाये उतना... और अगर एक हथेली से ना हो तो दुसरी खोज लो... दो अंजान हथेलियां किसी भी फासले को भर देती है... खतों की अपनी दुनिया होती है जहाँ उनके अपने किस्से, कहानियाँ, जिन्दगी होती है। देखा है कभी दो खतों का प्यार? दो खतों के बीच जो वक्त होता है उसमें दो लोग ही बेचैन नहीं होते दो कागज के टुकड़े भी बेचैन होते हैं या शायद होते थे... एक पच्चीस पैसे का टिकट लगा लिफाफा जाने कितने ही अनमोल खयालों को ले जाता था...दिन, दो दिन, या सप्ताह? दूर पास के कितने ही खतो...