तस्वीर और कविताएँ
लड़का लिखता था... लड़की तस्वीरें बनाती थी... दोनों के सपने उन तस्वीरों में रंग भरा करते थे...
तस्वीरों में कविताएँ उकेरी होती, तो कहानियों में रंग भरे होते...
तितलियाँ उड़ती तो उन संग उनको बुलाती उनके पीछे भागती लड़की का गीत लिखा जाता, चिड़ीयों की तस्वीर बनती तो उनकी कूक पर कविताएँ लिखी जाती...
आसमान जब जब रंग बदलता उसे एक खत लिखा जाता...
सितारे उकेरे जाते तो उनके टूटने पे कविताएँ होती...
सितारे उकेरे जाते तो उनके टूटने पे कविताएँ होती...
जब बरसात होती तो खिड़की पे आवाज करती बारिश की बूँदों जैसी कविताएँ लड़के की डायरी में मिलती...
कई बार ऐसा होता लड़की लड़के की तस्वीर बनाती... तो लड़का लड़की पे कविताएँ लिखा करता...
लड़का प्रेम पे कविताएँ लिखता तो लड़की दोनों की तस्वीर बना दिया करती...
लड़का प्रेम पे कविताएँ लिखता तो लड़की दोनों की तस्वीर बना दिया करती...
तस्वीर बनते गए, कविताएँ लिखी जाती रही...
प्रेम की जड़ गहरी होती रही...
प्रेम की जड़ गहरी होती रही...
जब उस की तस्वीर बनाया करता था
कमरा रंगों से भर जाया करता था।
पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे
मैं जंगल में पानी लाया करता था।
थक जाता था बादल साया करते करते
और फिर मैं बादल पे साया करता था।
~हाफ़ी💙
कमरा रंगों से भर जाया करता था।
पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे
मैं जंगल में पानी लाया करता था।
थक जाता था बादल साया करते करते
और फिर मैं बादल पे साया करता था।
~हाफ़ी💙
कविताएँ रह गई, तस्वीर रह गये!
Comments
Post a Comment