तुम्हारे लिए...♡
आसमान के सर्द कोनों में एक सितारा जाने कितनी सदियों से अकेलेपन को समेटे इर्द गिर्द के खालीपन को पाटता हुआ घूमता जा रहा था।
अकेलापन कितना भारी होता है, और सर्द भी!
उस सुनेपन में एक साथी की तलाश जैसे सदियों से उसके आसमान के खालीपन से भी खाली आंखों में दिखती।
इसी सुनेपन में कभी एक सितारा जैसे उसकी चमक को दोहराता हुआ करीब आया...
"नीला... हरा... लाल..."
रंग जैसे अच्छे से लगने लगे थे उसे और अब खालीपन को भरा जाना भी!
सदियों से सुख रही हाथ की लकीरें जैसे फ़िर उगने लगी, किस्से लिखे जाने थे। सितारों का साथ...
सदियाँ बीती, साथ गहराता गया। मगर जितनी सदियाँ उस सितारे ने देखी थी, ये वक्त बस पलक झपकते निकल गया।
खैर साथ लत जैसा होता है, और लत बुरी...
धरती के किसी कोने एक प्रेमी मांग रहा था अपनी प्रेमिका का साथ और सितारे की नई बनी दोस्त ने कुर्बानी दी।
आसमान में एक सितारा टूटा, प्रेमी की मांग मान ली गई।
सितारा बिलख के रो पड़ा। टूटे सितारे की गर्द से आवाज आई, "प्रेम सिर्फ साथ होने का नाम नहीं है, प्रेम दो लोगों को साथ करने का नाम भी है!"
सितारे ने प्रेमिका की खिड़की का रुख किया। वो अपनी प्रार्थना में उस लड़के को मांग रही थी।
"तुम्हारे लिए..."
सितारा टूट गया!
बहुत दर्द महसूस हुआ इसमे...
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